Home Dhinchak News क्युकी ऐतराज तस्वीर में उनको दिखाए जाने से है, तस्वीर से नहीं।

क्युकी ऐतराज तस्वीर में उनको दिखाए जाने से है, तस्वीर से नहीं।

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एक कहावत है कि दान जब दो तो इस तरह से दो की तुम दाहिने हाथ से कुछ निकालो तो बाए हाथ को कुछ पता ना चल सके। देश इस वक्त संकट की घड़ी से जूझ रहा है, ऐसे में पूरे देश ने जिस तरीके से एक जिम्मेदार नागरिक की तरह एक दूसरे को संभालने की जिम्मेदारी उठाई है वो काबिले तारीफ है।


क्या छोटा क्या बड़ा, हर हैसियत आदमी इस वक्त अपने स्तर पर किसी न किसी की किसी न किसी तरीके से मदद कर रहा है। जिनके पास बेशुमार दौलत थी उन्होंने इस वक्त अपने खजाने को जनता के लिए खोल दिया है, क्रिकेट सेलिब्रिटी यहां तक कि बड़े से बड़े कारोबारी भी इस संकट की घड़ी में देश के साथ खड़े हो गए है।


कुछ लोग अपने खाते से सीधा प्रधानमंत्री राहत कोष में मदद कर रहे है, तो कुछ लोग सड़कों पर निकल कर गरीब मजदूरों के खाने पीने का ख्याल रख रहे है। इस देश में इस लगभग सारे देश वासियों की बस एक ही इच्छा है कि इस आपदा का असर किसी गरीब के पेट तक न पहुंचे।
इसी बीच एक नई बहस छिड़ी हुई है कि क्या लोगो का भलाई के काम करते हुए फोटो खिंचवाना जरूरी है?


हम इंटरनेट पर ऐसी तस्वीरें के गवाह बन चुके है जहा पर एक केले को पांच लोग मिलकर मरीज को थमा चुके है। इतने लोग मिलकर तो किसी का बर्थडे का केक भी नहीं काटते। ये कहने वालो की तादाद ज्यादा है जिनका ये मानना है कि भलाई के काम में तस्वीरों की जरूरत नहीं है। कुछ लोगों का ये भी कहना है कि इन तस्वीरों में उन गरीबों को न शामिल करे जिन्हें राशन बांटा जा रहा है।


ऐसा करके उन्हें जलील किया जा रहा है क्युकी समाज का वो तबका गरीब जरूर था मगर भिखारी नहीं था, वो मेहनत से आधी रोटी ही सही पर रोज खाते थे, पर इस आपदा ने उनसे मेहनत कर कमाने का हक छीन लिया है।


इन तस्वीरों का एक दूसरा पहलू ये भी है कि इन तस्वीरों को देखकर सुकून मिलता है, सुकून इस बात का कि ऐसे लोग है दुनिया में जिन्हें अभी भी अपने पेट के अलावा दूसरे के पेट की फ़िक्र है,
ऐसे लोग है दुनिया में जो रात को खाना खाने से पहले ये चेक करते है कि उनके पड़ोस में कोई भूखा तो नहीं सो रहा है न।


इन तस्वीरों से पता चलता है कि इस लड़ाई में सब सिपाही है, जिसने सौ लोगों के खाने का इंतेजाम किया और जिसने अपनी गाढ़ी कमाई से सौ रुपए दान किए, इस लड़ाई में इन सारे सिपाहियो का योगदान बराबर है।


इसलिए मदद की तस्वीर इस वक्त की जरूरत है, ऐसी तस्वीरो से लोगो के अंदर कुछ करने का हौंसला आता है कि कुछ करने के लिए बहुत बड़ी रकम या हैसियत होना जरूरी नहीं है, बस एक साफ दिल और मजबूत हौंसला काफी है।


अगर आपके आस पास का कोई शख्स इस भले काम की तस्वीरे डाल रहा है तो उसे जज़ करके उसका हौंसला ना तोड़े, बल्कि गर्व के साथ और लोगो को बताइए कि आपके इलाके में ये भला काम तेजी से हो रहा है। इससे और लोगो के अंदर भी जज्बा आएगा। हा अगर कोशिश करे तो ये कर सकते है की राशन लेने वालों का चेहरा ब्लर कर दे, क्युकी ऐतराज तस्वीर में उनको दिखाए जाने से है, तस्वीर से नहीं।

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