Home Dhinchak Story चरित्रहीन कौन – गलती का एहसास

चरित्रहीन कौन – गलती का एहसास

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Hindi Story Charitraheen Kaun

आठवीं क्लास की बात है, मैं और मेरा दोस्त मैथ की क्लास के बीच में दूसरी बार टॉलेट का बहाना करके जा रहे थे। मैथ वाले गुप्ता सर अपने क्लास में सिर्फ़ पढ़ने वाले बच्चों को पढ़ाना पसंद करते थे, इसलिए हम सब को छूट थी कि क्लास के बीच में कोई भी उठकर जा सकता था। हमारे उस छोटे से स्कूल में कोई शौचालय जैसी चीज़ ना थी लड़कों की ख़ातिर, इसलिए हम सब स्कूल के बग़ल में बने एक घर के दीवारों के किनारे उगी घास को पानी दे आया करते थे।

ये अलग बात है कि पर्यावरण के लिए किए गए हमारे इस महान कार्य के लिए कोई पुरस्कार नही मिला आज तक।मैं और मेरा दोस्त इस बात के फ़ैसले में व्यस्त थे कि किसकी धार ज़्यादा दूर तक गयी है। दूरी के मापन के दौरान हमारी नज़र सामने की दीवाल पर गयी। जो कि हमारे हमले से हर बार बच जाती थी। दीवार पर जो लिखा था हम उसे पढ़ते ही प्रिन्सिपल के ऑफ़िस भागे।ऑफ़िस क़रीब आते आते मेरे और मेरे दोस्त के बीच इस बात की होड़ मच गयी की कौन सबसे पहले ये सूचना देता है प्रिन्सिपल को कि दीवार पर फिर से किसी ने चाक से LOVE YOU REENA लिख दिया है।

फिर से इसलिए क्यूँकि ये घटना पहले भी दो बार हो चुकी है। एक बार रीना के बैग में किसीने लेटर लिख कर रख दिया था।सर ने पूरे स्कूल के बच्चों की हैंड राइटिंग चेक करवायी पर कुछ हासिल ना हुआ। रीना के माँ बाप बुलाए गए। दूसरी बार रीना का नाम किसने ब्लैक्बॉर्ड पर लिख दिया था। फिर माँ बाप बुलाए गए। इस बार ऐसा तीसरी दफ़ा हुआ था। ख़ुशी के मारे मैंने एक साँस में सर को सब बताया। ख़ैर लंच हो चुका था इसलिए सर ने लंच तक मुक़द्दमा टाल दिया।

मैं लंच करने के लिए फ़ील्ड में गया। वहाँ मेरा अड्डा था कुछ झाड़ियों के बीच। मैं अपनी मीठी रोटी तोड़ ही रहा था की मुझे किसी के रोने की आवाज़ आयी। वो रीना ही थी। रीना जो कि मुझसे एक क्लास आगे थी। लड़के कहते थे कि आसपास के स्कूल छोड़ो किसी गाँव में भी उसके जैसी “माल” ना थी। उसके चाहने वाले बहुत से थे। कई बार लड़को ने आपस में लड़ाई कर ली थी सिर्फ़ उसकी वजह से। इस बात की शिकायत उसके घर कई बार जा चुकी थी। शुरू में वो लड़कों से बात करती थी। लेकिन जिस लड़के से वो बात कर ले स्कूल में ये ख़बर फैल जाती कि उस लड़के ने रीना को पटा रखा है।

कभी कभी वो लड़का ख़ुद ही लोगों से कहता ये बात। धीरे-2 उसने बात करना बन्द कर दिया।
उसको लेटर मिलने के बात तो बिलकुल बन्द। इस तीसरी घटना के बाद उसके माँ बाप को बुलाया गया। उन्हें ये कहा गया की आप अपनी लड़की को कही और पढ़वाइए,हमारे यहाँ ये नही पढ़ सकती। उसके बाप ने कहा भी कि इन चीज़ों में उसकी ग़लती क्या है?पर स्कूल वालों ने सिर्फ़ ये कहकर उनको चुप कर दिया कि इस स्कूल में इतनी लड़कियाँ है सिर्फ़ आप की ही लड़की को लेटर क्यूँ मिलते है?


उसी का नाम बार बार क्यूँ आता है?आख़िर क्यूँ लड़के उसी के लिए आपस में मार पीट करते है?
आप की लड़की भी लड़को को मौक़ा देती होगी वरना और लड़कियों के साथ ये सब क्यूँ नहीं होता? उसके माँ बाप के पास कोई जवाब ना था। उन्होंने उसका नाम तो कटवाया लेकिन उसे स्कूल भेजना बंद कर दिया। वो बस पेपर देने आती। मैं उसके चेहरे को देखता तो बहुत दुःख होता। लेकिन फिर दोस्तों की बात याद आ जाती। “अबे वो तो है ही ख़राब लड़की, ना जाने कितनो से मरवा चुकी है, राहुला बता रहा था की वो भी ठोंक चुका है उसे।”मेरे दोस्त जब ये कहते तो मेरे जहन में राहुल की तस्वीर तैर जाती जो कि मुझसे भी ज्यादा बदसूरत था।

“अबे कहा राहुल और कहा रीना, किसने कहा तुमसे ये सब?” मुझे यक़ीन ना हुआ था। “अबे रहुला बता रहा था, वो झूठ थोड़ी ना बोलेगा।”मैं शांत हो गया था। और यक़ीन हो गया की साली वो है ही रंडी तभी सब उसके बारे में बोलते है। ऐसे दावे ना जाने कितने लड़कों ने किए थे। दसवीं के पेपर के बाद उसकी शादी हो गयी। आज इतने सालों बाद धीरे धीरे पता चला की सारे लड़के फेंकते थे, उस जैसी “माल” को अपनी “माल” बताने में वो गौरव महसूस किया करते थे। इतने सालों बाद आज मैं सोचता हू की उस बेचारी की ग़लती क्या थी? सिर्फ़ ख़ूबसूरत होना?

आख़िर क्यूँ किसी और की ग़लती की सज़ा उसे मिली? क्यूँ आख़िर उसे हिदायत दी गयी की सड़क पर नज़र नीची करके चलो, क्यूँ आख़िर उन लड़कों को ना टोका गया है की वो क्यूँ परेशान करते है। आख़िर क्यूँ उसे स्कूल से निकालने को कहा गया सिर्फ़ स्कूल की इज़्ज़त बचाने के नाम पर। वैसे आप सोच रहे होंगे की ये सारे सवाल मेरे ज़हन में आज क्यूँ आ रहे है? उस वक़्त यक़ीन कर लिया तो फिर आज क्यूँ उसकी साइड ले रहा हू मैं? बात दरअसल ये है कि आज मेरी बेटी के स्कूल से फ़ोन आया है और मुझे बुलाया गया है क्यूँकि “लेटर मिला है उसके बैग से”
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